”वन धन योजना से बदली कुटमा गांव की महिलाओं की तस्वीर, दोना-पत्तल निर्माण से बन रहीं आत्मनिर्भर”
छत्तीसगढ़ के जशपुर वनमंडल अंतर्गत बगीचा वनपरिक्षेत्र के कुटमा गांव में वन विभाग की पहल से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में सराहनीय कार्य किया जा रहा है। वन धन योजना के तहत विशेष पिछड़ी जनजाति परिवार की महिलाओं को दोना-पत्तल निर्माण का रोजगार उपलब्ध कराया गया है। मीनू लक्ष्मी स्वसहायता समूह की 10 महिलाएं इस योजना से जुड़कर अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं। वन विभाग की यह पहल महिलाओं को गांव में ही रोजगार उपलब्ध कराने के साथ-साथ वनोपज के बेहतर उपयोग और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा दे रही है। आने वाले समय में इस योजना का विस्तार कर अधिक महिलाओं को इससे जोड़ने की तैयारी की जा रही है।

जशपुर वनमंडल के बगीचा वनपरिक्षेत्र स्थित कुटमा गांव में वन विभाग द्वारा महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने की अभिनव पहल की गई है। वन धन योजना के तहत मीनू लक्ष्मी स्वसहायता समूह की 10 महिलाओं को दोना-पत्तल निर्माण का कार्य दिया गया है। महिलाएं जंगल से माहुल, सरई और महुआ के पत्ते एकत्रित कर मशीन की सहायता से दोना और पत्तल तैयार कर रही हैं।

पहले ये महिलाएं केवल जंगल से मिलने वाली वनोपज पर निर्भर रहकर जीवनयापन करती थीं, लेकिन अब इस रोजगार से उनकी आमदनी बढ़ रही है और परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार आ रहा है। गांव की महिलाओं में इस योजना को लेकर उत्साह देखा जा रहा है।

*फूलों बाई पहाड़ी कोरवा, अध्यक्ष, मीनू लक्ष्मी स्वसहायता समूह*
“पहले हम जंगल की वनोपज से ही अपना गुजारा करते थे, लेकिन अब दोना-पत्तल बनाकर अच्छी आमदनी हो रही है। इससे हमारे परिवार की स्थिति बेहतर हुई है।”

*शशि कुमार, डीएफओ, जशपुर वनमंडल*
“वन धन योजना के तहत महिलाओं को गांव में ही रोजगार उपलब्ध कराकर उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत करना हमारी प्राथमिकता है। इसकी शुरुआत बगीचा के कुटमा गांव से की गई है। महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए हर संभव मदद की जा रही है और इसके लिए अलग से फंड भी जारी किया जा रहा है।”

वन विभाग की इस पहल से कुटमा गांव की महिलाओं को नया रोजगार मिला है। इससे न केवल उनकी आय बढ़ रही है, बल्कि वे आत्मनिर्भर बनकर अपने परिवार और समाज में नई पहचान भी बना रही हैं।



